टॉप 10 हिंदी कविताएँ माँ पर – माँ की ममता को समर्पित भावपूर्ण रचनाएँ

हिंदी साहित्य में माँ का स्थान हमेशा से सर्वोच्च रहा है। प्राचीन काल से लेकर आधुनिक युग तक, कवियों ने माँ के त्याग, स्नेह, बलिदान और अटूट प्रेम को अपनी रचनाओं में उकेरा है। हिंदी काव्य परंपरा में माँ को देवी का रूप माना गया है – कभी लक्ष्मी, कभी सरस्वती, तो कभी दुर्गा के रूप में। छायावाद काल के कवियों जैसे सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा ने प्रकृति के साथ माँ की ममता को जोड़ा, जबकि आधुनिक कवियों ने रोजमर्रा की जिंदगी में माँ की भूमिका को गहराई से व्यक्त किया। टॉप 10 हिंदी कविताएँ माँ पर की यह सूची न केवल प्रसिद्ध रचनाओं को शामिल करती है, बल्कि प्रत्येक कविता की गहराई, ऐतिहासिक संदर्भ, प्रसिद्धि के कारण और आधुनिक जीवन से संबंध को भी विश्लेषित करती है। ये कविताएँ हमें याद दिलाती हैं कि माँ का प्रेम समय से परे है – आज की व्यस्त जिंदगी में भी वही त्याग और समर्पण दिखाई देता है।

1. माँ तुझे सलाम – कवि: कवि प्रदीप

यह कविता देशभक्ति के साथ माँ के प्रेम को जोड़ती है। कवि प्रदीप, जो ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ जैसे गीतों के रचयिता हैं, ने माँ को राष्ट्र की जननी के रूप में चित्रित किया। प्रसिद्धि का कारण: यह कविता फिल्मों और देशभक्ति कार्यक्रमों में गाई जाती है, जहां माँ को सलाम करते हुए राष्ट्रप्रेम जगाया जाता है।

आधुनिक संदर्भ में, जब हम व्यस्त करियर में डूबे रहते हैं, तब भी माँ की दुआएँ हमें मजबूती देती हैं। व्यक्तिगत रूप से, यह कविता मुझे याद दिलाती है कि माँ का त्याग ही हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

कविता की कुछ पंक्तियाँ:
माँ तुझे सलाम, माँ तुझे सलाम
जो कुछ हूं मैं, सब तेरे कारण हूं
तेरी गोद में खेला, तेरे आंचल में बड़ा हुआ।

2. माँ – हरिवंश राय बच्चन

हरिवंश राय बच्चन की यह रचना छायावाद से प्रभावित है, जहां माँ को बचपन की स्मृतियों से जोड़ा गया है। बच्चन जी, जो ‘मधुशाला’ के लिए प्रसिद्ध हैं, ने यहां माँ की गोद को स्वर्ग बताया। ऐतिहासिक संदर्भ: 20वीं सदी के मध्य में लिखी गई, जब भारत स्वतंत्रता के बाद नई पहचान बना रहा था। प्रसिद्धि: यह स्कूलों में पढ़ाई जाती है और मदर्स डे पर शेयर की जाती है।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, जब बच्चे विदेश जाते हैं, तब माँ की यादें ही सहारा बनती हैं। मेरी नजर में, यह कविता सिखाती है कि माँ का प्यार कभी कम नहीं होता।

कुछ पंक्तियाँ:
कभी खिलौनों से खिलाया है माँ ने,
कभी आंचल में छुपाया है माँ ने,
गलतियाँ करने पर भी प्यार से समझाया है।

3. माँ की याद – सुमित्रानंदन पंत

छायावाद के प्रमुख कवि पंत जी ने प्रकृति और माँ को एकाकार किया। यह कविता माँ की ममता को अमर बताती है। प्रसिद्धि: पंत की प्रकृति-प्रेमी रचनाओं में यह विशेष स्थान रखती है। संदर्भ: प्रकृति से जुड़ी उनकी कविताएँ गांधीवादी युग से प्रभावित हैं।

आधुनिक जीवन में, जब हम शहरों में प्रकृति से दूर हैं, माँ की लोरियाँ ही सुकून देती हैं। यह मुझे व्यक्तिगत रूप से छूती है क्योंकि माँ को भगवान का रूप मानना भारतीय संस्कृति की नींव है।

पंक्तियाँ:
माँ की ममता अमर है,
तेरी लोरी में सुकून है,
तेरे स्पर्श में जीवन है।

4. माँ सब जानती है – दीपांशु गहलोत (आधुनिक कविता)

यह समकालीन रचना इंटरनेट युग में लोकप्रिय हुई। कवि दीपांशु गहलोत ने माँ की अंतर्ज्ञान को突出 किया। प्रसिद्धि: सोशल मीडिया पर वायरल, खासकर युवाओं में।

आज की पीढ़ी में, जब हम छुपाने की कोशिश करते हैं, माँ सब समझ जाती है – यह वर्तमान परिवारों की सच्चाई है। मेरे लिए यह कविता माँ को सच्चा दोस्त बताती है।

पूर्ण कविता की प्रमुख पंक्तियाँ:
माँ सब जानती है, तुझे खुद से ज्यादा पहचानती है,
लाख कोशिश कर तू छिपाने की, तेरे हर सुख-दुख को वो जानती है।

5. जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है – मुनव्वर राना

उर्दू-हिंदी के प्रसिद्ध शायर मुनव्वर राना की यह पंक्ति माँ की दुआओं को चित्रित करती है। पूरी कविता ‘माँ’ पर केंद्रित है। प्रसिद्धि: राना की शायरी मुशायरों में गूंजती है। संदर्भ: आधुनिक युग की असुरक्षा में माँ का सहारा।

व्यस्त जीवन में संकट आने पर माँ की याद आना स्वाभाविक है। यह मुझे भावुक कर देती है।

पंक्ति:
जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है,
माँ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है।

6. माँ का आंचल – महादेवी वर्मा

छायावादी कवयित्री महादेवी वर्मा ने माँ को छांव और स्वर्ग बताया। प्रसिद्धि: उनकी करुणा-पूर्ण रचनाओं में यह विशेष। संदर्भ: नारी विमर्श के युग में माँ की भूमिका।

आज महिलाएँ कार्यरत हैं, फिर भी माँ का आंचल सुरक्षा का प्रतीक है।

पंक्तियाँ:
माँ का आंचल छाँव है, तेरी गोद स्वर्ग है,
तेरे बिना ये जीवन अधूरा है।

7. माँ की ममता – मैथिलीशरण गुप्त

राष्ट्रीय कवि गुप्त जी ने माँ को सागर से तुलना की। प्रसिद्धि: खड़ी बोली के शुरुआती कवियों में।

आधुनिक संदर्भ: माँ का त्याग आज भी परिवार की नींव है।

8. ये दौलत भी ले लो – निदा फाजली (माँ के संदर्भ में)

निदा फाजली की यह गजल बचपन और माँ की गोद की चाह को व्यक्त करती है। प्रसिद्धि: जगजीत सिंह द्वारा गाई गई।

व्यस्त जीवन में बचपन की यादें माँ से जुड़ी होती हैं।

9. प्यारी माँ – रामधारी सिंह दिनकर

दिनकर जी की रचना माँ के त्याग को अनमोल बताती है। प्रसिद्धि: उनकी वीर रस की कविताओं के साथ।

10. लोरी – लोकप्रिय अनाम कविता

लोक कविताएँ माँ की लोरियों से जुड़ी। यह पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है।

मूल रचना: मेरी माँ – marahicharoli.in के लिए विशेष

माँ तेरी ममता की गहराई अनंत है,
तेरे आंचल में छुपा पूरा जहां है,
व्यस्त जीवन में भी तेरी याद आती है,
तेरा त्याग ही तो मेरी सफलता की कुंजी है।
हर मुश्किल में तेरा हाथ थामे हूं मैं,
माँ तू ही मेरी शक्ति, तू ही मेरा सहारा है।

ये टॉप 10 हिंदी कविताएँ माँ पर हमें माँ के प्रति कृतज्ञता सिखाती हैं। अधिक भावपूर्ण कविताएँ, शायरी और साहित्यिक लेखों के लिए marahicharoli.in पर नियमित विजिट करें। marahicharoli.in आपका विश्वसनीय स्रोत है ऐसी प्रेरणादायक सामग्री के लिए।

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